कल पानीपत मे मैने देखा अजब नजारा।
हिन्दूओ ने अपने भगवान को डूबा नदि मे मारा।
अगर किसी इन्सान को कोई पानी में डारे।
वह भी बचने के लिये हाथ पांव तो मारे।
मगर गणेश तो हो गये थे बिलकुल निढाल।
जे सी बी मशीन से रहे थे उसे निकाल।
कहीं से फूटा पेट था,,कहीं से टूटी सूंड।
खड़े तमाशा देख रहे वहां झूंढ के झूंढ ।
अगर किसी का आदमी जाये नदि मे डूब।
रोयेगे, चिल्लायेगे, शोक मनाये खूब ।
मगर अपने भगवान के डूबने पर रहे खुशी मनाये।
डी जे ढोल बजा रहे,नाचे और हुडदंग मचाये।
वाह रे गणेश लगता है तुम को भी क्रोध ना आये।
इनको भी लेकर डूबते फिर इनको आंख हो जाये।
शर्म ना आये ना दया,यह महा मूर्खों का टोल।
बुद्धि हो गई है भ्रष्ट, उडवाते खूब मखौल।
हाथ जोड़ विनंती करे,आपको रामनिवास ।
छुट जायेंगे यह पाखंड सभी पढलो सत्यार्थ प्रकाश ।
यदि सही लगे तो कमेन्ट अवश्य करें
और संदेश आगे शेयर करे।
*#copied*
हिन्दूओ ने अपने भगवान को डूबा नदि मे मारा।
अगर किसी इन्सान को कोई पानी में डारे।
वह भी बचने के लिये हाथ पांव तो मारे।
मगर गणेश तो हो गये थे बिलकुल निढाल।
जे सी बी मशीन से रहे थे उसे निकाल।
कहीं से फूटा पेट था,,कहीं से टूटी सूंड।
खड़े तमाशा देख रहे वहां झूंढ के झूंढ ।
अगर किसी का आदमी जाये नदि मे डूब।
रोयेगे, चिल्लायेगे, शोक मनाये खूब ।
मगर अपने भगवान के डूबने पर रहे खुशी मनाये।
डी जे ढोल बजा रहे,नाचे और हुडदंग मचाये।
वाह रे गणेश लगता है तुम को भी क्रोध ना आये।
इनको भी लेकर डूबते फिर इनको आंख हो जाये।
शर्म ना आये ना दया,यह महा मूर्खों का टोल।
बुद्धि हो गई है भ्रष्ट, उडवाते खूब मखौल।
हाथ जोड़ विनंती करे,आपको रामनिवास ।
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